Sunday, 16 October 2011

अब न तड़पाओ श्याम

आजा श्याम आ जा


सुबह से सांझ,सांझ से सुबह
हर पल बीता जाता हैं
सावन भादो हर ऋतू
आती और जाती हैं
पर तू क्यों नही आता श्याम?
क्यों हैं इतना तरसाता
अब न तड़पाओ श्याम
अब तो आ ही जाओ श्याम
सागर की हर लहर आती जाती हैं
आँखों से बिन्दु टपटपआते रहते हैं
तेरे इंतज़ार में व्याकुल नयना नीर बहाते रहते हैं
मन तडपता हैं दर्शन को तेरे 
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मैं तो तेरे नाम वाला प्रेम प्याला पीती रहू


जरा आ निकल के तस्वीर से
तू कुछ इस तरह
के होश-ओ-खबर ना हो मोको
मैं तेरे ही रंग में रंगी रहू
तेरी चाह में गिरधर गिरधर गाती फिरू
तेरी नाम मस्ती में झूमु फिरू
तू आ जाए सामने
मुझे होश ना हो
मैं तो तेरे नाम वाला प्रेम प्याला पीती रहू
तेरे नाम की मस्ती चडी रहे
मेरी हर साँस तेरे चरणों में पड़ी रहे
मेरा रोम रोम तुझपे हो न्योछावर
हर करम में मेरे तू श्याम आना
यारो का हैं यार तू
मेरे संग जो लगाई यारी
तो इस यार को भी श्याम
तू दरस दिखा जाना
मोहे अपना दीवाना बना जाना
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मुझे श्यामसुन्दर अपनी दीवानी बनाना


ओह मेरे कान्हा!
क्या कहू क्या न कहू?
क्या करू क्या न करू?
क्या सही क्या गलत?
क्या अछा क्या बुरा?
कुछ भी समझ न पाती हू 
बस मैं तो तेरी दीवानी 
तेरी ही रजा से चलना चाहती हू 
जैसे भी तेरी हो इच्छा 
वैसा ही तू मुझसे करवाना 
मुझे श्यामसुन्दर अपनी दीवानी बनाना 
मुझे बना तू कठपुतली अपने हाथो की 
जैसी हो मर्जी वैसे तू नचाना 
डोर थामना मेरी अपने हाथो 
जिस विध चाहो वैसे नचाना 
बस मोहे अपना बनाना अपने दर्शन करवाना 
श्याम जल्दी आ जाना
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मुरली को पकड़ अधरों से लगा रहे हो


तुम तो यूँ मुस्कुरा रहे हो
सितमघर,क्यों सितम हमपे ढा रहे हो
मुरली को पकड़ अधरों से लगा रहे हो
अलोकिक बंसी की धुन तुम बजा रहे हो
पर हमपे तो कयामत ढा रहे हो
तुम तो सितम पे सितम किये जा रहे हो
अपनी नजरो से घायल किये जा रहे हो
कजरारी आँखों से चलाये कितने ही तूने बाण हैं
किया घायल कईयों को ,लगाया मरहम भी कई बार हैं
अब तो आ जाओ,रखो मोरी लाज ओह श्याम
प्रेम रूप घनश्याम,
अपने प्रेम समुद्र की इक बूँद पिला जाओ
श्याम मोरे एक बार आ जाओ
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मुझे अपने प्यारे दरस करवाना मेरे साँवरे



ओह कान्हा मेरे प्यारे मुझको अपना बना ले 
चरणों की रज बना ले ,ओह कान्हा दर्शन अपने करा दे 
मन मेरा व्याकुल हैं रहता,दिल करता तुमसे पुकार हैं 
हटा दो पर्दा तेरे मेरे बीच का,दिखा दो दर्शन अपना घनश्याम रे 
अब देरी न लगाना,मेरे नीलमणि,श्याम प्यारे 
इन आँखों से जल्दी पर्दा हटाना मेरे प्यारे 
अपने प्यारे प्यारे दर्शन करवाना मेरे प्यारे 
हर समय खेलते लुका छिपी का खेल हो 
इस बार लुक छिप छोड़ 
मेरी आँखों की पट्टी हटाना मेरे साँवरे 
मुझे अपने प्यारे दरस करवाना मेरे साँवरे
संग मुझे अपने गोलोक लेजाना मेरे साँवरे

वो कृपालु हैं बहुत, दामन हमारा भर दिया


मैं तो कुछ भी ना दे पायी, श्याम ने सब कुछ दिया
प्रेम और सम्मान हमको, श्याम ने सबकुछ दिया
मैं तो उनके प्यार को भी, चरणों में ना धर सकी
वो कृपालु हैं बहुत, दामन हमारा भर दिया
उनके अनेको कर्ज थे, चुकता किया ना एक भी
श्याम ने बस मुस्कुरा कर, बाहों में ही भर लिया
उनकी प्यारी दास्ताँ को, मैं नही दुहरा सकी
श्याम ने बंसी बना कर, होंठो पर ही धर लिया
'' उनकी यह बातें, क्या सुनाऊ आपको
जखम विरह का हमारा, मलहम लगा के भर दिया
मैं तो कुछ भी ना दे पायी, श्याम ने सब कुछ दिया
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सारे जगत को छोड़ा हैं तेरे शौंक में

सारे जगत को छोड़ा हैं तेरे शौंक में 
सर को कलम हैं कर दिया तेरे शौंक में 
आँधियों से भी जला इक नन्हा सा दिया 
नटवर का था इक आसरा जलता था शौंक में 
तूफ़ान पे तूफ़ान था पर दिल नही रुका 
काफ्ला चलता रहा तेरे ही शौंक में 
तेरी ही राह पर मुझे इक रौशनी मिली 
'हरिदासी' चल पड़ी हैं तेरे ही शौंक में 

http://i296.photobucket.com/albums/mm164/apfharuno/dividers/313152.gif

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