Sunday, 16 October 2011

वो कृपालु हैं बहुत, दामन हमारा भर दिया


मैं तो कुछ भी ना दे पायी, श्याम ने सब कुछ दिया
प्रेम और सम्मान हमको, श्याम ने सबकुछ दिया
मैं तो उनके प्यार को भी, चरणों में ना धर सकी
वो कृपालु हैं बहुत, दामन हमारा भर दिया
उनके अनेको कर्ज थे, चुकता किया ना एक भी
श्याम ने बस मुस्कुरा कर, बाहों में ही भर लिया
उनकी प्यारी दास्ताँ को, मैं नही दुहरा सकी
श्याम ने बंसी बना कर, होंठो पर ही धर लिया
'' उनकी यह बातें, क्या सुनाऊ आपको
जखम विरह का हमारा, मलहम लगा के भर दिया
मैं तो कुछ भी ना दे पायी, श्याम ने सब कुछ दिया
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सारे जगत को छोड़ा हैं तेरे शौंक में

सारे जगत को छोड़ा हैं तेरे शौंक में 
सर को कलम हैं कर दिया तेरे शौंक में 
आँधियों से भी जला इक नन्हा सा दिया 
नटवर का था इक आसरा जलता था शौंक में 
तूफ़ान पे तूफ़ान था पर दिल नही रुका 
काफ्ला चलता रहा तेरे ही शौंक में 
तेरी ही राह पर मुझे इक रौशनी मिली 
'हरिदासी' चल पड़ी हैं तेरे ही शौंक में 

http://i296.photobucket.com/albums/mm164/apfharuno/dividers/313152.gif

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जो चढ़ ही चुका हरि चरणों पे,

जो चढ़ ही चुका हरि चरणों पे,
उसे हानि लाभ की क्या चिन्ता
जब मस्त शमा पे परवाना 
उसे जीवन मरण की क्या चिन्ता 
जो चल दरबार पे आया हैं 
उसे अपनी अकाल से क्या मतलब 
सिर रख के उठाया नही जाता
उसे सिर और धड की क्या चिन्ता 
मत प्रेम खिलौना जानो तुम
जरा प्रेम तत्व पहचानो तुम
जब तन में भसम रमा ही ली 
तो बनने बनाने की क्या चिन्ता 
यह मार्ग प्रेम का दीवानों 
मत खेल करो तुम नादानों 
जब इश्क लगाया प्रियतम से Sakhi Bhav - Kishorikripa
फिर कहने कहाने की क्या चिन्ता 

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अपने ही रंग में तू मोहे रंग दे


कान्हा के रंग में कौन नहीं रंगना चाहता  ये एक ऐसा रंग है जिसमे रंगने के बाद कोई और दूजा 
रंग नहीं भाता ---गौरी को श्याम रंग है भाया मोहे अपने ही रंग में रंग ले कान्हा ----- 
ऐ श्याम पुकारू तोहे बारम्बार
आजा श्याम आजा श्याम
दे जा मोहे तू अपना दीदार
अपने ही रंग में तू मोहे रंग दे
दीवानी अपनी मोहे बना जा
मेरी आँखों में तू अपना
प्रेम समुन्द्र का जल छिड़का जा
मेरे हृदय सिंघासन पे आ
मोहे श्याम खुद बी खुद अपनी बना
मैं न जानू कुछ भी
ज्ञान भक्ति वैराग्य कुछ भी न जानू श्याम
जानू तो बस तेरा इक नाम जानू
बस इतना ही जानू
के तू हैं मेरा सचा सहारा
तू ही मेरा यार तू ही दिलदार
तू ही तो हैं मेरा प्रीतम प्यारा
आजा न श्याम आजा
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मुझे अपनी शरण में ले लो नाथ


कान्हा रे ओह कान्हा सुन ले मेरी पुकार
मुझे बुला ले तू अपने पास
या फिर तू ही आजा न मेरे पास
तू इस कदर पास मेरे आना
के तेरे सिवा किसी और का ध्यान ही न रहे
मैं खो जाऊ तुझमें इस कदर
के दुनिया को कोई परवाह न रहे
मुझे अपनी शरण में ले लो नाथ
कृपा मुझपे कर दो मेरे नाथ
Pure love of radhey krishna

कृष्णा नाम के मतवालों को


श्यामसुंदर की यादें बड़ा ही सतावे
पर यह श्यामसुंदर मेरा
जाने क्यों अब तक न दरस दिखावे
जाने कौन भूल कर बैठे हैं हम
जो श्यामसुंदर मेरो रसिया
सामने होकर भी पर्दा न सरकावे
परदे में रहता हैं वो इस कदर
के न तो बेपर्दा होता हैं
और न ही छिपता है
परदे की ओट से ही वो देख रहा हैं
पागल बना रहा हैं दीवानों को
कृष्णा नाम के मतवालों को

तेरे रूप में ऐसा जादू हैं


तेरे रूप में ऐसा जादू हैं

तुझे निहारूं हर वकत

मन मेरा बेकाबू हैं

तेरी आँखों में

खुद को समाए जाती हूँ

अपनी सारी दुनिया तुझी में

बसाये जाती हूँ

तेरे होंठों की मुस्कराहट

को बस! निहारे जाती हूँ

तेरे इस श्रृंगार को बस!

मन में बसाये जाती हूँ

तेरा यह रूप जो अब

मेरी आँखों में समाया हैं

अब पलकें कैसे झुकाऊ

अब तू जो इन नैनन में

मनबसिया आन समाया हैं